बारहवीं सदी में बङ्गभूमि का संस्कृत-पुनर्जागरण

बारहवीं सदी में सेनराजों के प्रश्रय के कारण, बंगाल हिन्दू संस्कृति, कला एवम् साहित्य के एक महाघन पुनरुद्धार का साक्षी बना।

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प्रस्तरों में योग : योगमुद्राओं के सर्वारंभिक पाषाणशिल्प

समूचे भारत के सैकड़ों मंदिरों में, योगमुद्राओं का एक बृहत् भंडार विस्मृत हुआ पड़ा है। उसका शतांश इस आलेख में प्रस्तुत है!

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अद्वैतवाद का प्रवेशद्वार : आद्यशङ्कर का विवेकचूडामणि

लोकप्रिय सूक्ति "ब्रह्म सत्यं जगत् मिथ्या" के प्रतिपादक ग्रन्थ में ब्रह्मविद्या का अद्वैतवादी निरूपण!

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काशी-विश्वनाथ-मन्दिर का पुनरावृत्त-भञ्जन

काशी और इसका यशस्वी विश्वनाथ मन्दिर अनेक बार विध्वस्त हुआ और अन्तत: प्रत्येक बार भस्मावशेषों से उठ खड़ा हुआ!

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जैमिनीय उपनिषद्-ब्राह्मण : सर्व-प्राचीन किन्तु अति उपेक्षित उपनिषद्

जैमिनीय उपनिषद्-ब्राह्मण ने ॐ, प्राण, ध्यान एवम् पुनर्जन्म की लोकप्रज्ञा में महत्त्वपूर्ण स्थापनाएं की हैं!

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तांत्रिक हिन्दूधर्म में मंत्र एवं नाद की भूमिका

हिन्दूधर्म में मंत्र का संबंध आदिम अजन्मा शब्दों से है, जिन्हें वाच कहा गया, ब्रह्मांड के निर्मात्र!

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