कला-संस्कृति

प्रतीत, प्रतीक और प्रतिमा

प्रतीत अर्थात् अंत:स्तल की सर्वाधिक गह्वर अनुभूति से प्रतीक जन्मता है। तत्पश्चात् इसी प्रतीक से प्रतिमा की रूप-सिद्धि होती है, जिसे हम दैनिक अनुष्ठानों में पूजते हैं।

- वास्तुसूत्र उपनिषद (4.1)